“Being the youth of the Madhes we have to challenge the real problem of Madhes. We are the Young Soul of Young Madhes and We are the Youth who have Equal Responsibility for Empowering Madhes so Be uniting and make others too.”

Sunday, April 12, 2015

मधेश कि एक संक्षिप्त परिचय


मधेश एक भूगोल हैं ! मधेश एक महान संस्कृतिका उद्गम स्थल भी हैं !

मधेश पूरब में मेची से लेकर पश्चिम में महाकाली (शारदा) नदी तक फैला हुआ है ! इसके उत्तर में शिवालिक अर्थात् चुरिया पर्वत है ! चुरिया पर्वत के नीचे का समतल भूभाग ही मधेश है ! इसको पहले ‘मध्यदेश’ कहा जाता था !  ‘मध्यदेश’ से ही ‘मधेश’ नाम बना है !
मधेश का क्षेत्रफल लगभग २३,०६८ वर्ग किलोमीटर है
मधेश में मेची, कन्काई, कोशी, कमला, बागमती, गण्डक (नारायणी), राप्ती, बबई, कर्णाली (घाघरा) और महाकाली (शारदा) नदियाँ बहती हैं ! यहाँ का मौसम गर्म है !
मधेश में झापा, मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, सिरहा, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सा, चितवन, नवलपरासी, रुपन्देही, कपिलवस्तु, दांग, बाँके, बर्दिया, कैलाली और कन्चनपुर जिले पड़ते है ! मधेश में कुछ समतल घाटियाँ भी पडती है ! उसे भीतरी मधेश कहा जाता है ! भीतरी मधेश के कुछ हिस्से उदयपुर, सिन्धुली, मकवानपुर और सुर्खेत जिले में पड़ते हैं !
मधेश की जन संख्या लगभग सवा एक करोड़ है
मधेश में अनेक जात जातियाँ है
यहाँ के लोग मुख्य रूप से हिन्दू, इस्लाम, शिख, और बौध्द धर्म मानते है !
यहाँ मधेश के पर पर्व –त्यौहारों में से सिरुवा, चौरचन, जितिया, दशमी, सुखराइत, सामा-चकेवा, नेमान, तिला संक्राइत (माघी), फगुवा (होरी), नाग-पंचमी, जनउ पूर्णिमा(रक्षा-बन्धन), छठ, विवाह पञ्चमी, राम नमवी, बुध्द जयन्ती, गुरु नानक, और गुरु गोविन्द जयन्ती, ईद, रमदान, अशुरा (मोहरम) आदि मनाए जाते हैं
मधेशी लोग मैथली, भोजपुरी, थारू, अवधि, बज्जिका, उर्दू, राजवंशी, हिन्दी, सन्थाली, मुसलमानी जैसे मध्यदेशीय भाषा बोलते है
मधेश में पुरुष लोग प्राय: धोती, कुर्ता, गंजी, लुंगी, आदि पहनते है तो महिलाएँ साडी, घाघरा, चोली और कुर्त्ता-सलवार पहनती है 

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